अंतरराष्ट्रीय येती डी॰एन॰एस परियोजना
--केवल IPv6 सक्षम मूल डी॰एन॰एस सर्वर सिस्टम के परीक्षण की प्रयोगशाला

परिचय

"एक विष्व, एक इंटरनेट, एक नेमस्पेस" आज के इंटरनेट की सफलता का सार है।

अद्वितीय पहचानकर्ता प्रणाली के संचालन करने वाली शीर्ष स्तर डी॰एन॰एस मूल प्रणाली आज २५ से ज्यादा वर्षों से संचालित है। वर्तमान और भविष्य मे तेजी से विकसित और विस्तृत होते इंटरनेट को सुदृह और उपयोगी बनाये रखने की कसौटी पर शायद यह प्रणाली खरी न उतार पाये ।

इंटरनेट के निर्मांकर्ताओं ने इसे कुछ हजार कंप्यूटरो को जोड़ने के लिए बनाया था जो इसकी सफलता के साथ आज अरबों कंप्यूटरों को जोड़ता है और निकट भविष्य में यह संख्या खरबो में पाहुचने की संभावना है। इंटरनेट के इतने भव्य विस्तार का बड़ा कारण, इंटरनेट प्रोटोकॉल और डी॰एन॰एस प्रणाली की स्थिरता को माना जाता है।

भविष्य की चुनौतियों का मुकाबला करने के लिए और अधिक उन्नत स्तर तक विकसित होने वाले नए विचारों और पद्धति का परीक्षण और कार्यान्वयन, चलते हुए इंटरनेट पर कठिन होगा और इंटरनेट की स्थिरता के लिए खतरा बन सकता है।

इंटरनेट प्रोटोकॉल संस्करण ४ आज दम तोड़ रहा है और संस्करण ६ भविष्य के इंटरनेट के लिए आशा लेकर आया है। समग्र रूप से इंटरनेट के विकास को लाभ पहुंचाने के लिए, डी॰एन॰एस मूल नाम सेवा की समीक्षा और सीमाओं की खोज करने और उसमे अधिक उपयोगी तकनीक विकसित करने के लिए एक समानांतर प्रायोगिक लाइव IPv6 डी॰एन॰एस मूल सिस्टम बनाने के लिए इस प्रोजेक्ट की स्थापना की गई है।

यह ध्यान देने योग्य बात है कि येती वैकल्पिक नाम स्थान प्रदान नहीं कर रहा है और वर्तमान के नाम स्थान जो इंटरनेट पर स्थापित है उनही का इस्तमाल करेगा जिससे वर्तमान के इंटरनेट की स्थिरता और संप्रभुक्ता पर कोई खतरा न आए।

येती परियोजना की शुरुआत 2015 में हुई जिसमे विश्व भर में 25 मूल डी॰एन॰एस स्थापित किए गए और 8 जन रेसोल्वर सर्वर स्थापित किए गए। ईआरनेट में पहला मूल सर्वर मार्च 2015 में बैंग्लूरू मे स्थापित हुआ। इसके बाद जून में एक मूल सर्वर दिल्ली में स्थापित हुआ और इस परियोजना का एक मात्र आई॰डी॰एन सर्वर बंगलूरू में स्थापित हुआ। इसी के साथ भारत और चीन 3-3 सर्वर स्थापित करके सबसे ज्यादा सर्वर स्थापित करने वाले देश बने।

भारत ने दो रेसोल्वर, एक दिल्ली और एक बंगलुरु में स्थापित कर अपना पूर्ण योगदान दिया।

इस परियोजना में इंटरनेट और IPv6 के ऊपर अनेक प्रयोग हुए और बहुत ही महत्वपूर्ण खोज और जानकारियां सामने आई जिन्हे विश्व के समक्ष प्रस्तुत किया गया और शोध का आगे का रास्ता खुला।

पहला चरण अब समाप्त हो गया है और दूसरे चरण की तयारी है जिसे 2020 के शुरुआत में प्रारम्भ होना था लेकिन कोविद19 महामारी के कारण विलंभ हो गई है और जल्दी ही शुरू होगी।


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